मेले की लड़ाई पहुंची कलेक्टर की दहलीज, मेले की आड़ में कुछ लोग उतार रहे सीएमओ पर अपनी खीज....
*सीएमओ बोले वित्तीय हालात खराब हैं संस्था की, बेवजह का मुद्दा न बनाओ कभी तो अपनी जिम्मेदारी को समझो और हम पर भी दया दिखाओ....*
*।। चर्चित समाचार एजेंसी।।*
शिवपुरी को अगर आने वाले समय में मेले की नगरी का नाम दिया गया तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगा क्योंकि, आज से लगभग 6 साल पहले तक यहां सिर्फ एक ही मेला लगता था जिसे आमजनता के मनोरंजन के लिए सिद्धेश्वर मेले प्रांगण में लगाया जाता था। वहींं साल भर में एक या दो क्राफ्ट के ऐसे भी मेले लगते थे जो मनोरंजन का साधन कम पर पारंपरिक और स्थानीय वस्तुओं के समावेश को दर्शाते थे। मगर देखते ही देखते इन 6 सालों में शिवपुरी में मेलों के हालात कुछ इस तरह हो गए कि अब हर माह एक ठेकेदार खड़ा है मेला लगाने के लिए जगह को जुगाड़ने में,कभी सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में मेला नगर पालिका शिवपुरी द्वारा आहूत किया जाता था। इसके बारे में कहा जाता था कि यह मेला केवल और केवल आम जनता के मनोरंजन के लिए लगाया जाता है जिसमें मेले की आमदनी के बारे में भी काफी बातें प्रचलित थीं जैसे कि आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया। सन 2021 में जब सीएमओ शैलेश अवस्थी आए तो उन्होंने नगर पालिका की वित्तीय हालत को समझते हुए और ठेकेदारों का मेले के आयोजन में होने वाली कमाई की तरफ रुझान के चलते मेला लगाने के लिए स्थान को किसी भी क़ीमत में लेने की मंशा को भांप लिया और चला दी एक नई परंपरा,कि मेला प्रांगण को आगे से ठेके में दिया जाएगा और तब से लेकर अब तक यह प्रथा दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की के साथ बढ़ती गई। हालात यह हुए कि अब एक ही समय में दो जगह मेले लगने की बारी आ गई।
*ग्रीष्मकालीन मेला यानि सिद्धेश्वर मेला परंतु अब तो हर तरफ है मेला..*
पहले गर्मियों की छुट्टी में स्थानीय के अलावा जिलेभर से आए लोग अपने बच्चों के साथ सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगने वाले मेले में जाते थे पर जैसे ही मेले का स्वरूप बदला और रोजगार पाने के चलते मेले लगाने वाले ठेकेदारों में बढ़ोतरी हुई तो संस्था ने भी इस मर्म को समझ लिया और मेले लगाने वाले इच्छुक लोगों को टेंडर के माध्यम से जगह को किराए पर देने का मन बना लिया। इसी का परिणाम है कि अब गर्मियों में गांधी पार्क में भी मेला सजने की तैयारी हो गई है।
*इस मेले से न सिर्फ नगरपालिका को होगा फायदा बल्कि आम जनता के साथ व्यापारियों को भी मिलेगा लाभ..*
यहां बताना उचित होगा कि सिद्धेश्वर मेले का होली से 15 दिवस पूर्व शिवरात्रि को भूमि पूजन कर दिया जाता है और होली के पश्चात यह मेला लगता है जिनकी समय अवधि पहले 30 दिन हुआ करती थी फिर इसे बढ़ाकर 45 दिन कर दिया गया। चूकिन इस मेले से नगर पालिका शिवपुरी को भी खासी आय होती थी इसको राजस्व विभाग ने भी ढंग से समझा और अपना हिस्सा बढ़ा दिया यानि पहले मंदिर प्रांगण की जगह को मात्र डेढ़ से दो लाख रुपए ही मिलते थे वहीं आज की स्थिति में नगर पालिका से राजस्व विभाग मंदिर प्रांगण की जगह से 50% की पार्टनरशिप की बात करने लगा है। दरअसल ठेकेदारी प्रथा में पहले 18 लाख फिर 36 लाख फिर 42 लाख फिर 48 लाख यह सब 30 दिन के लिए था। फिर इसके बाद सीएमओ इशांक धाकड़ इसी मेले का टेंडर 62 लाख (45 दिन के लिए) कर दिया था 45 दिन की समय अवधि करने के पीछे का जो मंतव्य था वह सिर्फ इतना सा था कि 30 दिन मेला लगने के बाद ठेकेदार स्वाभाविक रूप से नगर पालिका के अधिकारी और जिम्मेदारों को पीछे के रास्ते से टच करने का प्रयास करते थे और 7 से 15 दिन अधिक बढ़ाने के नाम पर 5 से 10 लाख रुपए तक की पेशकश कर दिया करते थे।जिसे इशांक धाकड़ ने नगर पालिका का वित्तीय नुकसान मानते हुए 30 की जगह 45 दिन का टेंडर करना उचित समझा। लेकिन इसमें राजस्व विभाग के मुखिया ने 50% की हिस्सेदारी की मांग रख दी जिसे देख कर नगर पालिका के जिम्मेदार समझ गए कि इसमें हमारी जिम्मेदारी एवम वफादारी ज्यादा परंतु संस्था का फायदा कम हो रहा है। वर्तमान सीएमओ इशांक धाकड़ ने नगर पालिका के पजेशन में आने वाले गांधी पार्क को भी मेले के लिए आरक्षित करने एवं इसकी दर स्थापित करने की मांग पीआईसी में रख दी और बाद में परिषद् ने इस मांग को 25 रूपए स्क्वायर फीट फॉर 1 मंथ के लिए सर्वसम्मति से पास भी कर लिया। इसके बाद पिछले साल इसे देने की कवायद भी चली पर वह फलीभूत नहीं हो सकी। इस बार इन्होंने अपनी जगह को नगरपालिका की शर्तानुसार "पहले आओ पहले पाओ" की अपनी रणनीति के तहत ठेकेदार भागचंद शिवहरे को 1125000 में 1 माह के लिए सौंप दिया अब इस जगह पर 20 मार्च से लेकर 20 अप्रैल तक मेला चालू हो जाएगा। जिससे यहां पर दुकान लगाने वाले व्यवसाईयों का तो फायदा होगा ही साथ ही साथ जगह ज्यादा होने कारण लोग अधिक से अधिक इंजॉय कर पाएंगे। वहीं नगर पालिका को मिलने वाली 11 लाख 25000 रुपए की बड़ी रकम से कम से कम 120 छोटे कर्मचारियों का एक माह का वेतन भी निकल आएगा।
*यहां नगरपालिका के जिम्मेदार खुश,ठेकेदार खुश, व्यापारी खुश, जनता खुश तो दुखी कौन..??*
गांधी पार्क में लगने वाले इस मेले से जहां नगर पालिका ने फायदा लिया है वहीं ठेकेदार भी सारी व्यवस्थाओं के साथ जगह पर अपना सामान इकट्ठा करने एवं लगभग शुरुआत करने में काफी खुश दिखाई दे रहा है। वहीं जनता को भी इस बात की खुशी है कि इस बार दो मेले लगेंगे तो सामान नया ओर अधिक सस्ता एवम रेटों में भिन्नता के साथ मिलेगा वहीं जगह बदलने बच्चों को घुमाने में अच्छा लगेगा।
परंतु कुछ विघ्नसंतोषी लोगों को यह मेला रास नहीं आ रहा है खास करके उन लोगों को जो लोग सिद्धेश्वर मेले में अपनी दुकान लगाते हैं या पार्किंग का कहना ठेका लेते हैं वह लोग भी इस जगह फ्री में अपनी जुगाड़ देख रहे हैं और इसी के चलते नगरपालिका के जिम्मेदारों पर नाना प्रकार के आरोप भी मढ रहे हैं जैसेकि आपके द्वारा ठेकेदार का पुलिस वेरिफिकेशन क्यों नहीं किया गया..?? जबकि सीएमओ का इस मामले पर साफ कहना है यह बात सही है कि पिछली बार सिद्धेश्वर मेला देते समय हमने पुलिस वेरिफिकेशन की मांग की थी। पर तब हमें यह यह बताया गया था कि संबंधित ठेकेदार पर विभिन्न अपराधों में मामले दर्ज हैं। लेकिन बाद में यह पता चला कि यह तो सिर्फ मेले में व्यापारियों से आपस में कुछ अवांछित लोग जोकि वहां पर अपना वैधानिक फायदा ढूंढते हैं उनके साथ हाथापाई का मामला था जिसे लेकर इस बार सीएमओ ने यह आपत्ती जरूरी नहीं समझी और अपनी जगह पर मेला लगाने की मंजूरी दे डाली। जिसे लेकर सिद्धेश्वर मेले में पार्किंग के नाम पर अवैध वसूली करने वाले लोग, मेले के अंदर कुछ विशेष और बड़ी दुकान सस्ते में या फ्री में लगाने वाले लोगों ने एक कुनबा बनाकर प्रायोजित रचना रचकर माहौल बनाए का रहा है। ऐसा खुद नगर पालिका के सीएमओ इशांक धाकड़ एवं ठेकेदार भागचंद शिवहरे का कहना है। वहीं आरोप लगाने वाले इस तथ्य को मिथ्या बता रहे हैं। कह रहे हैं कि इस मेले में ठेकेदार और सीएमओ की मिलीभगत है।
*अगर मैदान खिलाड़ी का तो नोटिफिकेशन कब जारी हुआ..*
सीएमओ नगर पालिका शिवपुरी से जब हमने यह पूछा कि यह मैदान खेलने वाले खिलाड़ियों का है और आपके मेला लगाने से उनके हितों का नुकसान हो सकता है तब उनका यह कहना था कि गांधी पार्क कभी भी खेल का मैदान नहीं रहा है और नाहि इसके लिए कोई नोटिफिकेशन अभी तक जारी हुआ है। रही बात खिलाड़ियों के खेल में बाधा पड़ने की तो मेले के लिए हमारे द्वारा ग्राउंड का आधा हिस्सा ही दिया गया है आधा मुख्य हिस्सा जो मुख्य मार्ग के समीप लगता है वहां की जगह खाली है और ज्यादातर खेल की एक्टिविटी वहीं पर होती है तो हमने किसी का हक नहीं मारा है जिसके लिए जो जगह होनी चाहिए वह दी गई है, चूंकि जगह नगरपालिका की है तो नगर पालिका संस्था का भी अपना दायित्व बनता है कि कम से कम अपना हक तो ले ले, आखिर कब तक हम लोगों के ताने सुनकर उनके लिए भले के लिए आगे आते रहेंगे, कभी तो हमारे बारे में भी सोचिए जनाब। खिलाड़ियों को लेकर ओबीसी महासभा ने कलेक्टर शिवपुरी को जो ज्ञापन सौंपा है, अगर वह सिर्फ खिलाड़ी हित के लिए है तो फिर इस जगह को किसी भी कार्यक्रम के लिए नहीं दिया जाना चाहिए फिर चाहे वह मेला हो या कोई और गतिविधि क्योंकि खेल और खिलाड़ी का नुकसान चाहे 30 दिन का हो या 3 घंटे का यह नुकसान हमारे देश के भविष्य पर एक चोट है।
और यह तब संभव है जब खुद राज्य शासन नोटिफिकेशन जारी करे कि यह मैदान केवल और केवल खेल के लिए इस्तेमाल हो सकता है। उससे पहले तो इस पर नगर पालिका का अधिकार है और हमें अपने अधिकार से कोई वंचित नहीं कर सकता है।
लेखक:-वीरेंद्र "चर्चित"
एक टिप्पणी भेजें