साहब की थी फरमाइश या बाबू खुद ही चल गया चार घर.. मामला नगरपालिका कर्मचारी को 40 हजार लेते रंगे हाथों पकड़ने का..
जिसे लोकायुक्त ने 40 हज़ार की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा, उसका पैसे मांगने के आरोप में सीएमओ ने तीन दिन पहले ही किया था स्थापना से तबादला...
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी 18/04/2026।। शिवपुरी नगर पालिका में भ्रष्टाचार की रोज एक नई कहानी निकलकर सामने आ रही है, बहुचर्चित घोटाले वाली नगर पालिका में आज एक और नया मामला सामने आया जिसमें स्थापना के बाबू ने नगरपालिका के निलंबित ए आर आई से बहाल कराने के एवज में लूटना चाहे 60 हज़ार रूपये, जिसमें वह कुछ हद तक कामयाब भी हुआ मगर, आखिरी किस्त लेते समय मशीन की गरारी ऐसी अड़ी कि सीधा इंजन ही फेल हुआ। मतलब कि आहब-साहब के दरबार में शिकायत नहीं हुई भ्रष्टाचारियों के शैतानों के दरबार में पेशी हो गई और धर लिया शैतानों ने अपने जबड़े में, फिर क्या था..!! शरीर के हर अंग से जो द्रव्य निकला उसने वहां के पानी को ही नहीं बल्कि माहौल को भी सुर्ख लाल बना दिया।
दरअसल 14 नवंबर 2025 को शिवपुरी नगरपालिका के ए आर आई हरिवल्लभ चंदौरिया को उनके काम में लापरवाही के चलते सस्पेंड कर दिया, जिसकी बहाली के चलते श्री चंदौरिया ने कई लोगों के दर पर माथा टेका, मगर किसी भी देवता ने उनकी अर्जी को कोई विशेष समर्थन नहीं दिया, समय बीतता गया, चंदोरिया को धंधे से हाथ धो बैठने का डर सताने लगा तभी नगरपालिका के एक चित्रगुप्त ने एक गुप्त सलाह दे डाली जिसमें देवता को खुश करने की आरती के साथ चढ़ावे का मंत्र भी दे डाला, हरि के बल्लभ भी समझ गए कि अब भगवान से नहीं भगवान लाल से पार पड़ेगी और पहुंच गए अपना दुखड़ा लेकर, चूंकि भगवान लाल करोलिया समझदार था वह हाल ही सारी स्थिति को समझ गया..
और कर दी साहब के नाम से 60 हज़ार की पेशकश, वो भी साहब से बात किए बिना ही चूंकि भगवान लाल भी अपने प्रभु यानि सीएमओ साहब (इशांक धाकड़) के पास हरिवल्लभ की सुपारी लेकर बहाली की सिफारिश करने पहुंच गए। चुंकि हरिवल्लभ चंदौरिया एक ऐसा व्यक्ति है जो अपनी जेब से 60 रूपये नहीं खर्च कर सकता यह बात स्पाइडर मैन, ही मैंन, स्टंट मैंन, मैन ऑफ द मैन अच्छे से जानते थे तो यंग मैन ने इस प्रकरण में दिलचस्पी न दिखाते हुए, भगवान को चलता कर दिया साथ ही भगवान की फाइल खोलते हुए उनके सिरपर चित्रगुप्त और बैठा दिया। नतीजा यह हुआ कि रवि जो मिलते हैं कभी-कभी की जुगलबंदी ने इनका सारा चिट्ठा साहब तक पहुंचाना चालू कर दिया,
तीन माह से भगवान को नहीं मिल रहा था वेतन, कहीं पापी पेट ने तो नहीं कराया यह सब..
भगवान लाल के लेनदेन के किस्सों के बीच एक श्रमिक कर्मचारी नेता ने हड़ताली आह्वान के मध्य कर्मचारियों के EPF काटे जाने के बाद भी ईपीएफ खाता संधारण न होने की आवाज बुलंद की, जिसमें दोषी भगवान लाल पाए गए तो भगवान की सैलरी आना भी बंद हो गई थी। जिसकी सैलरी निकाले जाने की पैरवी भी साहब के चैंबर में कई बार वही नेता करते नज़र आए जिनकी आवाज से भगवान की लंका लग गई थी, पर साहब ठहरे मैन ऑफ द मैन,(सुपर मैन) वो नहीं माने और मामला यूं ही चलता रहा।
जब घूस की शिकायत पहुंची सीएमओ के दरबार, तो साहब ने बदल दिया विभाग का आकार..
भगवान की बिना सैलरी के घर चलाने के लिए घूस लेने की शिकायत जैसे ही सीएमओ के दरबार में पहुंची, सीएमओ ने तत्काल प्रभाव से भगवान लाल करोलिया का विभाग ही बदल डाला। दर्शित नोटशीट के अनुसार इनको स्थापना लिपिक सहायक से लिपिक सहायक स्वास्थ्य विभाग बना दिया और ऑर्डर 16 अप्रैल 2026 को सीएमओ ने निकलवा दिया, और 18 अप्रैल शनिवार को भगवान लाल करोलिया बाकी के 40 हजार रिश्वत के मामले में लोकायुक्त की टीम के बीच धरे गए।
बैक डेट में फाइल चलाने का भी है चलन..
यहां यह बताना लाजिमी होगा कि ज्यादातर विभागों में बैक डेट में फाइल चलाने का चलन जोरों पर है नगर पालिका में तो कुछ ज्यादा है जिसपर हमने खुद जांच की कि तीन दिवस पूर्व नगर पालिका के यंग मैन ने इसका ट्रांसफर किया भी था या अपने आप को बचाने की कवायद में बैकडेट हथियार फिर निकल आया, जिसमें इनके डिपार्टमेंट के कुछ कर्मचारी जो हमारे सूत्र भी हैं और इनके कर्मकांडों को बताने वाले भी। उनका भी कहना यही था कि तीन दिन पहले सीएमओ ने पैसे मांगने की शिकायत पर इसको स्थापना से हटाया है यह सही है परंतु 60 हज़ार रुपए बिना अधिकारी की मर्जी के बाबू अकेला खा जाए यह मुश्किल हैं, पूछा मुश्किल क्यों असंभव क्यों नहीं..?? जवाब था जिसे तीन माह से सैलरी न मिली हो वह ऐसा कर सकता है, यह सोचकर कि पैसे की बात से साहब खुश जाएं, और लगे हाथ मुझे भी माफ़ कर दें या हो सकता है यह सोचा हो कि अभी अपना काम चला लूं सैलरी आते ही इसको वापस कर दूंगा, और कह दूंगा काम नहीं हुआ यह भी हो सकता है, बहरहाल अभी यह नहीं कहा जा सकता है कि *_साहब की थी फरमाइश या बाबू खुद ही चल गया चार घर..*_
ए आर आई हरिवल्लभ थे नॉन परफॉर्मेंस इसलिए हुए सस्पेंड.....
यहां यह बात भी सामने आई है कि हरिवल्लभ चंदौरिया क्यों सस्पेंड हुए जिसमें पता चला कि अधिक से अधिक राजस्व इकट्ठा करके नगर पालिका को खुद के पैरों पर खड़ा करके खुद चलाओ की बात आयुक्त लेवल से सभी सीएमओ को मीटिंग में समझा दी गई थी इसी तर्ज पर हरिबल्लभ चन्दौरिया को भी उनके वार्ड से अधिक से अधिक बसूली करने की हिदायत दी गई पर श्री चंदौरिया जो कहते वह लेकर नहीं आते थे। यह बात पूरी नगर पालिका के एक एक कर्मचारी को मालूम है कि चंदौरिया सभी से यही बात करते थे कि एक बार मुझे आरआई बना दो थैले भर-भर के नोट न आएं तो मेरा नाम बदल देना हमको भी यह श्री चंदौरिया कई मर्तवा कह चुके हैं साहब को भी यही घुट्टी चटा दी साहब ठहरे स्पाइडर मैन खट से एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग पर छलांग लगा गए और चंदौरिया को दे डाला अपने ही वार्ड से उगाही का काम, अब चंदौरिया भी रोज शाम को थैले भरकर लाने लगे।
*नोट घर पर और बातें साहब के आगे ऑफिस में* चूंकि साहब ठहरे स्पाइडर मैन खट से वहां पहुंचे जहां यह कांड कर आए जिसके चलते ही साहब ने किया श्री चंदौरिया को सस्पेंड...।।
अब सवाल यह उठता है कि जिस भगवान लाल को तीन माह से वेतन न मिला होने के चलते घूस लेने की शिकायत पर स्थापना विभाग से हटाया गया हो फिर उसी से दूसरे के नाम पर रिश्वत लेना क्या जोखिम भरा नहीं है..?? यह सीएमओ भी जानते हैं।
दूसरा यह कि भगवान लाल ने फोन पर चंदौरिया बहाल कराने के बदले 60000 रुपए सीएमओ को पहुंचाने की बात कही ऐसा लोकायुक्त के अधिकारी ने बताया कि फोन रिकॉर्डिंग में आया है तो यह बात भी जानने की जरूरत है कि अगर भगवान लाल सीएमओ को रुपए देने की बात नहीं रखते तो क्या चंदौरिया उन्हें 60 हजार देने को राजी होता..??
शायद 60 रूपये भी नहीं देता..!!
और अगर रुपए नहीं आते तो भगवान सर्वाइव कैसे करते..??
और भगवान लाल सीएमओ के अलावा किससे बहाल कराते..??
श्याम लाल (चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से)
विषय आरोपों से हटकर सोचने पर मजबूर करता है।
निष्कर्ष:- जिसे नुकसान पहुंचाया गया हो उससे आप फायदे की उम्मीद अगर करते हैं तो यह आप खुद के साथ कर रहे बेमानी हैं जिसकी कीमत भी आपको ही चुकानी है।
लेखक:- वीरेन्द्र "चर्चित"
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