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मिस्टर खरे तुमने कितने रूप हैं धरे...!! आग देखकर दूध की तरह तुम उबाल भी ले आते हो, और पानी के कुछ छीटों में ही ठंडे भी पड़ जाते हो.. खरे तुम यह कलाकारी कहां से लाते हो...??

मिस्टर खरे तुमने कितने रूप हैं धरे...!! आग देखकर दूध की तरह तुम उबाल भी ले आते हो, और पानी के कुछ छीटों में ही ठंडे भी पड़ जाते हो.. खरे तुम यह कलाकारी कहां से लाते हो...??

अतिक्रमण प्रभारी खरे, छोटी सी कार्रवाई में नहीं उतरे खरे.. 
इधर फोन आया विधायक का, उधर CMO सहित खरे भी रह गए धरे, और उस पर तुर्रा ये कि चालानी कार्रवाई के 500 भी खरे ने अपनी जेब से भरे..
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
हां तो कहानी यहां से स्टार्ट करते हैं कि ग्वालियर बायपास शिवपुरी में एक मिष्ठान दुकान संचालक ने अपनी दुकान का वेस्टेज वाटर निकालने के लिए एक गड्ढा बायपास रोड के किनारे खोद दिया जिसकी सूचना आसपास के लोगों ने नगर पालिका के जिम्मेदारों तक पहुंचा दी। जैसे ही सूचना अतिक्रमण प्रभारी अशोक खरे तक पहुंची खरे तुरंत ही मौका ए स्थल पर दौड़ पड़े। वहां पहुंच थोड़ा अपना रुवावी अंदाज दिखाया तो मजदूर उनके तमतमाते चेहरे को देखकर डर गए और काम वहीं रोक दिया दुकानदार को लगा कि मेरा चलता काम रख सकता है तो वह सीधे दुकान से उठकर रोड क्रॉस करके विधायक के दफ्तर में जा पहुंचा।  यह वही विधायक जी हैं, जो हैं तो पोहरी के पर शिवपुरी में अपनी खासी दखल रखते हैं और गाहे बगाहे शिवपुरी नगर पालिका की कार्यशैली पर बातों ही बातों में तंज कसकर भाजपा पार्टी पर निशाना लगाने से नहीं चूकते हैं। पर आज समस्या यह थी कि एक सगे पड़ोसी ने विपक्ष के विधायक को जोर से याद कर लिया और याद करने वाला और कोई नहीं पोहरी विधायक को कई कार्यक्रमों में मिठाई सप्लाई करने वाला था। तो अब अपने की लाज भी बचाना थी और अपने के आगे अपनी लाज भी बचाना थी तो एमएलए साहब के ऑफिस पिलरों ने अपनी दम दिखाते हुए नगरपालिका अध्यक्ष को फोन पर ही कार्य को न रोकने का कह दिया। नगर पालिका अध्यक्ष ने भी अपना फर्ज निभाया और सीएमओ से कह खरे को वापस बुलवा लिया।
 *फिर हुई एंट्री हमारी तो ख़बर चली कुछ यूं,छोड़ भोजन थाली दौड़े खरे फिर से ज्यूँ के त्यूं..* 
खरे साहब तमतमाते चेहरे को लिए मोटर साइकिल से आए और आते ही बोलने लगे,बंद करो काम, ए काम बंद करो।
अरे साहब....!!
काम बंद तो बंद....।।
दुकानदार मामले को समझ पाता तब तक खरे ने एक फोन और घुमा दिया और कहा तुरंत आओ यहां एक चालान काटना है। वहां से भी आवाज आई कि अभी हम नाले पर हैं  तो खरे बोले मैं खाने की थाली छोड़कर आ सकता हूं तुम नाल छोड़कर नहीं आ सकते तो तुरंत आओ। अब दुकानदार समझ गया कि मामला ज्यादा गंभीर हो गया है तो दुकानदार अपनी दुकान से बाहर निकल आया और ब्लैक ट्रैक सूट में ठुमक- ठुमक कर कैलाश कुशवाह के ऑफिस पहुंच गया फिर वहां से एक फोन घुमाया और फोन पकड़कर वापस ठुमक-ठुमक कर खरे साहब के पास आया, दुकानदार कुछ बुदबुदाया पर खरे का गुस्सा सातवें आसमान पर था, तो समझकर भी कुछ समझना नहीं चाहा, अब दुकानदार को कुछ बात बनती नहीं दिखी तो फिर से ट्रैक सूट में ठुमक ठुमक कर वापस विधायक के ऑफिस पहुंच गया वहां पर उपस्थित विधायक के पालतू पिलर ने कुछ स्पेशल अंदाज में खरे को अपने पास बुलाया।  भरपूर गुस्से में कार्यालय तक गए खरे पर जैसे ही कार्यालय पहुंचे खरे वहीं के वहीं रह गए धरे.. अब नज़ारा यह था कि अतिक्रमण प्रभारी अशोक खरे भी दुकानदार के संग कदमताल मिलाते नज़र आए.. 
और मुस्कुराते हुए ठुमक ठुमक कर रोड़ क्रास करते हुए हमारे पास आए.. 
हमने पूछा क्या हुआ..?? 
तो खरे मुस्कुराए और बोले, रख लिया सम्मान... 
अब दुकानदार साहब लगाएंगे 11 पेड़ और भरेंगे 500 का चालान.. 
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब पेड़ तो छोड़ो 500 का चालान भी दुकानदार ने खरे की जेब से भरवाया... 
जब विधायक को सुनाई सारी कहानी तो उन्होंने भी कह डाली अपने दिल बात मुंह जुबानी..
अब 11 नहीं 51 पेड़ लगवाऊंगा 
हमने पूछा विधायक से जिसका तुमने रखा था मान, उसने तो कर्मचारी की जेब से भरवाया है चालान ....
इस पर विधायक कैलाश कुशवाह बोले यह बात मेरी जानकारी में नहीं है मैं एक विधायक हूं लोग मेरे पास समस्या लेकर आते हैं उन्हें सुलझाना मेरा काम है अब इसमें किसी कर्मचारी के जेब से पैसे लगे हैं तो मुझे बहुत दुःख है मैं उससे बात करूंगा और रही बात पौधारोपण की तो मैं मेरी विधानसभा में लगातार पेड़ लगाओ अभियान चलवाता हूं अब यहां भी 11 की जगह मैं 51 पेड़ उसी दुकानदार से लगवाने का संकल्प लेता हूं।
अब समस्या यह है कि जिन्हें अपने विधानसभा के ही इतने काम हैं क्या वह यह छोटे कार्यों में रुचि लेंगे..?? 
क्योंकि जमीन के लिए पेड़ काटना आसान है..
पर जमीन पर बने रहने के लिए पेड़ उगाना बहुत मुश्किल है शायद..!!

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