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सोनू माइनिंग करता था हर माह चौथ बसूली.. दो ट्रैक्टर के 10 हजार रुपए प्रतिमाह लेता था...क्या सच बोल रहा है गजराज....??

सोनू माइनिंग करता था हर माह चौथ बसूली.. दो ट्रैक्टर के 10 हजार रुपए प्रतिमाह लेता था...क्या सच बोल रहा है गजराज....??

सोनू माइनिंग करता था हर माह चौथ बसूली.. 
दो ट्रैक्टर के 10 हजार रुपए प्रतिमाह लेता था...
क्या सच बोल रहा है गजराज....??
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। 03/04/2026।।हाल ही में एक वीडियो सामने आया है जिसमें रेत और मुरम का अवैध काम करने वाले व्यक्ति गजराज रावत ने खनिज विभाग के इंस्पेक्टर सोनू श्रीवास पर घूस लेने के लिए आरोप लगाए हैं और यह आरोप  बेहद ही खुले तरीके से मढ़े गए हैं जिसमें यह कहा गया है कि माइनिंग विभाग के इंस्पेक्टर सोनू श्रीवास मुझसे प्रत्येक ट्रॉली के पांच हजार रुपए वसूलते थे मेरे द्वारा दो ट्रैक्टर ट्रॉली जो मुरम चलाई जाती थीं इसकी एवज में मेरे द्वारा हर माह सोनू श्री वास को 10000 रुपए हर माह दिया जाता था और ऐसा मैंने लगभग 1 साल तक किया, बात तब बिगड़ी जब मेरे पैर का ऑपरेशन होना था तो मेरे द्वारा पैसे देने में थोड़ी देरी कर दी, तो सोनू मीनिंग ने मेरे खिलाफ केस बनाकर मुझे खनन माफिया बनाने की तैयारी कर ली। बकौल गजराज उन्होंने अपनी तकलीफ भी बताई जिस पर सोनू मीनिंग ने कहा या तो मुझे 30000 रुपए मेरा हफ्ता दे दो या मैं तुम्हारे खिलाफ केस बना दूंगा मेरे द्वारा ना कहने पर विधायक से मिलकर मुझ पर तीन लाख साठ हजार का जुर्माना अधिरोपित  करवा दिया। 
पूछे जाने पर कि रिश्वत कैसे ली जाती थी..??  तो बताया कि शहर की सुप्रसिद्ध दुकान प्रेम स्वीट्स पर यह डील हुआ करती थी और घूस की राशि कैश में दी जाती थी वह भी काजू कतली मिठाई के डिब्बे में, क्योंकि साहब को काजू कतली बहुत पसंद थी। ऐसा आरोप  खनन माफिया गजराज रावत ने मीडिया के समक्ष माइनिंग इंस्पेक्टर सोनू श्रीवास पर मढ़े हैं। 
वहीं एक अन्य बड़ौदी स्थित पत्थर फड़ संचालक  ने कुछ और ही कहा उनका कहना है कि..
माइनिंग इंस्पेक्टर सोनू श्री वास जो कभी माइनिंग विभाग में एक सर्वेयर होते थे आज वह अपनी ईमानदारी के चलते, माइनिंग इंस्पेक्टर बन चुके हैं, और माइनिंग इंस्पेक्टर बनते ही उन्होंने खनन माफिया की नाक में दम कर रखा है। यह मानिए कि सोनू जहां से गुजरते हैं वहां पर से माफिया अपना जगह छोड़ जाता है इस ईमानदारी की वजह से ही सोनू कलेक्टर शिवपुरी के चहेते भी बने हुए हैं 
ऐसा कहना है माइनिंग इंस्पेक्टर सोनू श्री वास के एक चहेते का...
वहीं दूसरी ओर नाम ना बताने की शर्त पर ग्वालियर बाईपास स्थित एक और रेत फड़ संचालक ने नई कहानी बता दी,
बकौल फड़ संचालक, और माइनिंग इंस्पेक्टर के आलोचक जो उनकी कमियां गिना रहे हैं पर कुछ सच्चाई भी बता रहे हैं उनके अनुसार वर्तमान माइनिंग इंस्पेक्टर को महाभ्रष्ट मानते हुए कहा कि माइनिंग इंस्पेक्टर महा झूठा, बेईमान, और अव्वल दर्जे का भ्रष्ट अधिकारी है वह बिना पैसे के मामले में दिलचस्पी न रखे यह बात तो आम कर्मचारी और अधिकारी किसी के लिए भी माकूल हो सकती है परंतु वह तो पैसे के लिए किसी को भी दांव पर लगा देता है । उसका हिसाब तो बिल्कुल दबंग फिल्म के चुलबुल पाण्डेय की तरह ही है जो छेदीलाल से कहता है कि जब तब बैग भरा आता रहेगा तब तक तेरा काम चलता रहेगा जिस दिन रुका उस दिन इतनी गोलियां चलेंगी कि कंफ्यूज हो जाओगे कि हंगना किधर से है और....
बस बिल्कुल यही हाल है सर्वेयर से इंस्पेक्टर बने साहब का, यह 36 कलाओं में माहिर हैं सिर्फ इतना ही लोग जानते हैं परन्तु इनके अंदर तो 52 गुण हैं कहां से आए समझ से परे..??
हमने कहा कि अधिकारी यूं ही नहीं बन जाते हैं पढ़ना पड़ता है इस पर इनका विशेष शुभ चिंतक बोला कि हमने पढ़े लिखे लोग भी देखे हैं पर इतना गुणवान व्यक्ति नहीं देखा जो अपना बनाकर ही मारता है।
फिल्हाल जो बात इस वीडियो में खनन माफिया गजाधर ने आरोप लगाते हुए कही है वह एकदम सही हैं।
वहीं हमने कहा कि मीडिया में तो महाशय की कार्रवाई को लेकर हमेशा माफियाओं में हड़कंप मचा रहता है तो इस पर साहब के विशेष शुभ चिंतक बोले कि साहब को हड्डी चबाने वाले कुत्ते पालने का शौक शुरू से रहा है, क्वालिटी यह है कि साहब कुत्तों को पालते तो हैं, पर इतना ही खिलाते हैं कि वो रोटी न छिन जाएं सिर्फ इसी की चिंता में लगे रहें ज्यादा खिला दीं तो वह गर्रा सकते हैं, और घुर्राऊ कुत्ते श्री मान को पसंद नहीं। वैसे वह खुद भी पत्रकार हैं,अपनी तारीफ़ खुद ही लिख लेते हैं वह भी बेहतर....
इस तरह के आरोप लगाए उस शख्स ने,हमने कहा यह आरोप बेबुनियाद हैं ऐसे आरोपों पर श्री मान मानहानि के मामले में कोर्ट में जा सकते हैं,तो चहेते का साफ़ कहना था कोर्ट सबके लिए बराबर हैं हम कहते हैं वह कोर्ट जाएं तो सही हमारे पास वो सबूत हैं जिसके बाद न रहेंगे इंस्पेक्टर न रहेगें सर्वेयर तो सोच समझकर दावा पेश करना कहीं लेने के देने न पड़ जाएं।

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