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मंडी के चोर... शोर मचाते घोर......

मंडी के चोर... शोर मचाते घोर......

 
यह सब सुनकर  आज हमारा मन है बड़ा उदास... .........
गरीब का चूल्हा अब कैसे जलेगा क्या तनिक नहीं अहसास.?
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी 09/05/26।। मामला शिवपुरी के दो फुटकर गल्ला व्यापारी भाइयों का है, जो पिपरसमा गेट के बाहर चावला तौल कांटे के निकट अपना फुटकर गल्ले खरीदी का फड़ चलाते हैं। इन दोनों भाइयों के घर का चूल्हा उनके इसी फुटकर धंधे से चलता है, बेसिकली यह दोनों भाई यानि शिव कुमार गुप्ता और सचिन गुप्ता जो कि वर्तमान में शिवपुरी के सिटी सेंटर और अमृत विहार कॉलोनी में निवास करते हैं वह स्थाई निवासी बैराड़ कस्बे के हैं। चूंकि यह दोनों भाई अपने बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता के चलते ग्रामीण कस्बे से निकलकर शहर में आ गए,जहां जो काम वह कस्बे में करते थे अब शहर में करने लगे। मगर वह लोग शहर के चालाक गिद्धों से परिचित नहीं थे इसलिए धोखा खा गए। बकौल सचिन पहली बार उन्होंने घूस मांगे जाने पर बाबू श्री मन जायसवाल को 10000 रुपए दिए, लेकिन अगले महीने फिर बाबू जी वापस मांगने पहुंच गए, तब दोनों भाई बोले पिछले महीने ही तो दिया था अब क्या हर महीने..?? 
बाबू बोले और क्या पूरे साल का दिया..??
सचिन बोले और नहीं तो क्या.....?? अब हर महीने कैसे दूंगा..??  500 से 700 रूपये रोज कमाऊंगा और 350 रोज के हिसाब से तुम्हे चढ़ावा..!!! धंधा बंद कार लूंगा पर ऐसी हराम की कमाई नहीं है कि आधी तुमको दे दूं..।। फिर क्या बाबू जी ने दीपक को आदेश दिया और उठा लाए तौल कांटा...
व्यापारी भी तैयार होकर पहुंच गए कलेक्टर ऑफिस..
बात बिगड़ती दिखी तो चार व्यापारियों की जुर्माना सूची लाकर खड़े हो गए बाबू जीऔर बोले हम तो जुर्माना बनाने आए थे ये झूठी कहानी बना रहे हैं। इनके तौल कांटे गड़बड़ हैं।
इस पर व्यापारी बोले अब तो कांटा तुम पर ही है चेक कर लो....
जुर्माना बनाना था तो नियम से पंचनामा बनाते..!! सील करते..!!
 पर यह क्या..?? चोरों की तरह कांटा उठा ले गए और बोले..
हवेली पे आ जाना....।। हवेली..!!! क्या रखा है हवेली पर..?
हवेली मतलब ऑफिस आ जाना..।। दोनों भाई मंडी ऑफिस न जाकर कलेक्टर ऑफिस पहुंच गए और दे आए आवेदन पूरे आरोपों के साथ..। 
पर क्या हुआ..?? ऑफिस वाला बाबू फील्ड में काम कर रहा है, फील्ड वाला निरीक्षक मंडी के दरवाजे पर दरवान बने खड़ा है, हम्माल आढ़तिया बना है, आढ़तिया व्यापारी बना है, व्यापारी भ्रष्टाचारी बना हैं।
और जो बच्चे पालने के लिए छुटपुट कामगार बना है वो बेचारा घर बैठकर बच्चे ही पाल रहा है।
एक माह होने को है कोई कार्रवाई नहीं हुई। 
बस हुई तो छोटे व्यापारी की दुकान बंद हो गई..।।
लेखक:- वीरेंद्र "चर्चित"

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