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मौत के दूतों की निर्दयता खुद की लापरवाही ने ले ली प्रसूता की जान...

मौत के दूतों की निर्दयता खुद की लापरवाही ने ले ली प्रसूता की जान...

 अस्पतालों के नाम पर मौत का निजीकरण पैसा भी गया और जान भी...
(मामला शिवपुरी शहर के एक निजी अस्पताल का है, जहां गगन अग्रवाल ने अपनी प्रसूता पत्नी निधि अग्रवाल को बेहतर इलाज की उम्मीद में भर्ती कराया। अस्पताल जिला अस्पताल के बेहद करीब होने और सरकारी डॉक्टरों के वहां सेवाएं देने से भरोसा और बढ़ा, लेकिन आरोप है कि भारी फीस लेने के बावजूद लापरवाही हुई और हालत बिगड़ने पर मरीज को सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया। सवाल उठ रहा है कि जब डॉक्टरों को खुद अपने इलाज पर भरोसा नहीं, तो निजी व्यवस्था के नाम पर मरीजों से मोटी रकम क्यों ली जाती है—(क्या यह मौत का निजीकरण नहीं?)
शिवपुरी सुखदेव हॉस्पिटल में प्रसूता की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। परिजनों ने जिला कलेक्टर को शिकायत देकर अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर इलाज में लापरवाही,  का आरोप लगाया है।
इन लोगों पर लगाए हैं मुख्य आरोप 
मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर शिखा जैन सहित जिला अस्पताल में वर्तमान आर एम ओ आर पी सिंह और सुखदेव हॉस्पिटल के संचालक दीपक गौतम का नाम आरोपियों की सूची में शामिल. हैं।* इन डॉक्टरों द्वारा प्रायवेट अस्पताओं में अपनी निजी सेवाएं देने पर इनकी और अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है।
ऐसे समझें पूरे मामले को 
शिकायत के अनुसार, 28 मार्च 2026 को निधि अग्रवाल का सिजेरियन ऑपरेशन किया गया, लेकिन ऑपरेशन के बाद उनकी हालत बिगड़ती रही। आरोप है कि लगातार ब्लीडिंग और यूरिन की समस्या के बावजूद समय पर विशेषज्ञ को नहीं बुलाया गया और कई घंटों तक उचित मॉनिटरिंग नहीं हुई। बाद में हालत गंभीर होने पर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां कुछ घंटों में उनकी मौत हो गई।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि बाद में HELLP Syndrome बताकर पहले की लापरवाही छिपाने की कोशिश की गई। साथ ही यह सवाल भी उठाया गया है कि शासकीय चिकित्सक निजी अस्पताल में सेवाएं कैसे दे रहे थे और अस्पताल के संचालन में भी अनियमितताएं हैं।
परिजनों ने मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर सख्त कार्रवाई और अस्पताल का लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग में हलचल तेज हो गई है।

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