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यहां डॉक्टर की ही नहीं सुनता निचला स्टाफ, तो आमजन को सुनेगा कौन, क्या खुद सिंधिया...??

यहां डॉक्टर की ही नहीं सुनता निचला स्टाफ, तो आमजन को सुनेगा कौन, क्या खुद सिंधिया...??

यहां ऐसी घटनाएं रोज घटती हैं शायद इसलिए फर्क नहीं पड़ता यहां के स्टाफ का मामला जिला अस्पताल का..
(कम शब्दों में बड़ी खबर)...(मरीज़ की वेदना)..
।।चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। 25/05/2026।।
शिवपुरी जिला अस्पताल में 24 मई की रात 10 बजे एक मामला सामने आया जब एक मरीज दर्द से कराह रहा था और वह रात्रि कालीन भर्ती होकर ईलाज कराना चाहता था, ड्यूटी डॉक्टर संतोष पाठक ने उसे बकायदा देखा भी और पर्चे पर भर्ती होने का मार्क भी कर दिया। थोड़ी देर बाद हमारा शिवपुरी हॉस्पिटल विजिट हुआ। घूमते हुए हम ट्रॉमा सेंटर के इमरजेंसी डॉक्टर ड्यूटी कक्ष में चले गए जहां चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर संतोष पाठक की ड्यूटी थी। अब हुआ यह कि वह पेशेंट जिसे पेट में दर्द और घबराहट थी वापस ट्रामा के इमरजेंसी कक्ष में पहुंच गया। डॉक्टर ने अपने व्यवहार के चलते और हमे देखकर भर्ती पर्चे पर द्वारा नोट लगाते हुए एक वार्ड के प्रभारी को बुला लिया, वह आया और मरीज को साथ ले गया थोड़ी देर बाद मरीज फिर से वापस आ गया, और अब निचले स्टाफ में पदस्थ नर्स ने स्पष्ट लिख कि पेजेंट के साथ कोई अटेंडर नहीं है इसलिए हम इसे भर्ती नहीं कर सकते हैं जो कहानी अब तक मौखिक चल रही थी अब लिखित में आ गई, अब ड्यूरी डॉक्टर परेशान, नर्स इसे झेल नहीं रही और पत्रकार के सामने भगा भी नहीं सकता। आखिरकार डॉक्टर ने अपर मैनेजमेंट में बात की तब कहीं जाकर उसकी व्यवस्था बनी।

एक और नई कहानी सुनी खुद पेशेंट की जुबानी..
वहीं एक और नई कहानी उसी चैंबर में आई जब एक 20 वर्षीय युवती जो छाती और पेट में दर्द के चलते हॉस्पिटल की नई बिल्डिंग में भर्ती थी। उसकी शिकायत थी कि उसे उल्टी आ रही हैं जिसे ड्यूटी नर्स और स्टाफ नर्स को बताया गया पर उन्होंने बिना डॉक्टर परामर्श के कोई भी ट्रीटमेंट देने से मना कर दिया। यहां तक तो ठीक था अब कहानी यह हुई कि महिला पेशेंट को खुद इंजेक्शन लिखाने के लिए ट्रामा सेंटर आना पड़ा क्योंकि कि यह जहमत न तो नर्स उठाना चाहती थी न कोई मेडिकल का स्टाफ..! यह देखकर डॉक्टर से रहा नहीं गया उन्होंने बोल ही दिया कि आप क्यों आईं अटेंडर को भेज देतीं, तो वह बोली मैं यहां बिल्कुल अकेली हूं। डाक्टर ने कहा नर्स ने स्टाफ को बोला होता वह आ जाता। वह बोली...
नर्स ने कहा है दर्द तेरा है तू ही दवा लिखाकर ला...
डॉक्टर ने यह सुनकर माथा पटक लिया कि अब करें तो क्या करें..!!
यह स्थिति तब बनी जब हम सामने थे पीछे क्या होता है पता नहीं है.. ??
अपर मैनेजमेंट में सी एस बी एल यादव का पूरा हस्तक्षेप रहता है तो वह टाइट चलता है पर निचला स्टाफ तो अपने हिसाब से चलता है जिस पर कोई पाबंदी नहीं है यही कारण है कि जिला अस्पताल बेवजह बदनाम होता हैं।
लेखक:-वीरेंद्र "चर्चित"

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