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कल के दोनों पत्रों पर लोगों का ध्यान आया.. पत्र के जारी होते ही आम जनता और नेताओं का रुझान आया...

कल के दोनों पत्रों पर लोगों का ध्यान आया.. पत्र के जारी होते ही आम जनता और नेताओं का रुझान आया...

।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी 04/07/2026।। कल दो पत्र सोशल मीडिया की सुर्खियों का केंद्र बनते नज़र आए 
"एक किसी के भोपाल से आने का और भोपाल बुलाए जाने का" .. 
यह दोनों पत्रों को पढ़कर लोगों के मन में अतिउत्साह दिखा, उसके पीछे जो तर्क था वह यह था कि शिवपुरी नगरपालिका की खाली हॉट सीट पर शिवपुरी की जनता सहित पार्षद और नेतागण एक काबिल सीएमओ को देखना चाह रहे थे, एक लंबे अंतराल के बाद वह कामना पूरी हो गई हालांकि नगरीय विकास एवं आवास विभाग बल्लभ भवन भोपाल द्वारा सीएमओ की शिवपुरी पदस्थापना के लिए पत्र में जिस तरह से शब्दों का इस्तेमाल किया गया वह आमजनता या कहें थोड़े बुद्धजीवी को भी सोचने पर मजबूर कर रहा है, चौक चौराहे पर चर्चा है कि,...ऐसा कोई करता है क्या यार..??
यह तो गाली देकर पुचकारना हुआ या कहिए.. 
सोले फिल्म का वह डायलॉग हुआ जिसमें जय अपने दोस्त वीरू की बढ़ाई करता है और उसे जुआरी, शराबी, कबाड़ी,रगाड़ी सब कहने के बाद कहता है कि लड़का बहुत अच्छा है।
दूसरे पत्र ने बढ़ाया राजनैतिक पारा, लोग इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक प्रहार कहने लगे तो नेता इसे प्रोपोगंडा बता रहे हैं.. 
वहीं मध्यप्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय बल्लभ भवन भोपाल द्वारा समानांतर समय में एक पत्र और जारी होता है जिसमें वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा और पूर्व सीएमओ इशांक धाकड़ पर जिला प्रशासन की जांच में शिवपुरी नगरपालिका के विकास कार्यों एवं खरीदी में भ्रष्टाचार किया दर्शाया गया है उस भ्रष्टाचार की जांच रिपोर्ट के आधार पर भोपाल वल्लभ भवन में चल रहे प्रकरण में सुनवाई के लिए दोनों को 9 जुलाई को बुलाया है, इस पेशी में स्पष्ट उल्लेख किए गया है कि यदि आप पेशी के समयांतर्गत उपस्थित नहीं होते हैं तो कार्रवाई एक पक्षीय कर दी जाएगी।
इन पत्रों के बाद लोगों के भांति-भांति के रुझान आ रहे हैं।
आमजनता एवं कुछ पार्षद नेता इसे अध्यक्ष को हटाने से पूर्व की प्रक्रिया बताते हुए नगर पालिका शिवपुरी में सुधार का एक प्रयास मान रहे हैं,तो वहीं रूठे हुए पार्षद इसे 5 जुलाई को होने वाले कार्यक्रम में पार्षदों एवं रुष्ठ जनता को मनाने का एक पुराना झुनझुना बता रहे हैं जो बज तो रहा है पर मधुर नहीं है।
अब देखना यह है कि राजनीति यह ऊंट किस करवट बैठेगा।
लेखक:- वीरेंद्र "चर्चित"

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