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दस्तावेजों में ‘जिंदा’ होने की जद्दोजहद, गिठला आदिवासी ने कलेक्टर को लिखा धन्यवाद पत्र....

दस्तावेजों में ‘जिंदा’ होने की जद्दोजहद, गिठला आदिवासी ने कलेक्टर को लिखा धन्यवाद पत्र....

।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी (रन्नौद) 21/08/2026।। जनसुनवाई में एक साधारण आदिवासी युवक की समस्या को गंभीरता से सुनकर उसके त्वरित निराकरण की पहल करने पर सेसई, रन्नौद निवासी गिठला आदिवासी ने जिला प्रशासन के प्रति आभार जताया है। गिठला ने कलेक्टर को धन्यवाद पत्र सौंपते हुए कहा कि प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता ने उसके जीवन की एक बड़ी चिंता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
गिठला ने अपने पत्र में कहा कि जनसुनवाई के दौरान उसकी समस्या को धैर्य और आत्मीयता के साथ सुना गया तथा मामले के निराकरण के लिए तेजी से सकारात्मक प्रयास किए गए। उन्होंने कहा कि दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाले जरूरतमंद लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनका समाधान करना सुशासन का उदाहरण है।
गिठला ने कहा कि सही समय पर मिली मदद और न्याय ही प्रशासन के प्रति आमजन का विश्वास मजबूत करता है। समस्या के समाधान की दिशा में हुई कार्रवाई से उसका और उसके परिवार का प्रशासन के प्रति भरोसा और मजबूत हुआ है।
रन्नौद CMO को कलेक्ट्रेट बुलाकर जताया आभार.....
गिठला आदिवासी ने इस पूरे मामले में रन्नौद नगर परिषद के CMO विष्णु भदकारिया के योगदान को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने CMO को विशेष रूप से धन्यवाद देने के लिए कलेक्ट्रेट कार्यालय शिवपुरी बुलाया।

गिठला ने CMO से कहा, “मुझे जिंदा साबित करने में आपका भी बड़ा योगदान है। अगर आप नहीं होते तो शायद मैं कभी भी दस्तावेजों में जिंदा नहीं हो पाता।” उन्होंने CMO की तत्परता और सहयोग के लिए आभार जताया।

पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने गया था, दस्तावेजों में खुद ही ‘मृत’ हो गया.....

दरअसल, गिठला आदिवासी रन्नौद के वार्ड क्रमांक 14 के सेसई गांव का निवासी है। करीब 10 वर्ष पहले उसके पिता का निधन हुआ था। इसके बाद गिठला अपने पिता का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने ग्राम पंचायत पहुंचा था।
गिठला के अनुसार, दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया में उसके पिता के स्थान पर उसका ही नाम दर्ज हो गया और कागजों में उसे मृत घोषित कर दिया गया। पढ़ा-लिखा नहीं होने के कारण उस समय वह दस्तावेज में हुई इस गंभीर गलती को समझ नहीं सका।
बाद में जब वह अपना आधार कार्ड बनवाने पहुंचा, तब उसे पता चला कि सरकारी दस्तावेजों में तो वह पहले ही ‘मर चुका’ है। इसके बाद शुरू हुई खुद को दस्तावेजों में दोबारा ‘जिंदा’ साबित करने की जद्दोजहद।

गिठला ने इस समस्या के समाधान के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए। तमाम अधिकारियों और CMO कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद अब प्रशासन की पहल से मामला समाधान की दिशा में पहुंचा है। यही वजह है कि गिठला ने कलेक्टर से लेकर रन्नौद CMO तक सभी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताया।


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