ए ई बोले 29 तक मिल सकता है पानी, सीएमओ बोले 1 तक देंगे पानी,ठेकेदार के काम की गति की अलग ही है कहानी, कैसे मिलेगा नए साल में शहर को पानी..??
*ठेकेदार की मनमर्जी का आमजनता ने भरा हर्जाना...*
*पहले दिखाया FIR का डर तो ठेकेदार ने दिखाया कोर्ट का आदेश फिर मान मानमनौव्वल से कराया काम..*
*।। चर्चित समाचार एजेंसी।।* शिवपुरी की मड़ीखेड़ा पानी की सप्लाई बाधित हो चुकी है,, 24 दिसंबर को ग्वालियर बायपास के पास लाइन का एक हिस्सा जॉइंट की तरफ से फूट गया तथा पानी प्रेशर से रोड पर बहने लगा। नगर पालिका के जिम्मेदारों को जैसे ही ब्रेकेज का पता लगा तुरंत ही उन्होंने पानी की सप्लाई को रोक दिया, चूंकि जॉइंट पर ब्रेकेज काफी बड़ा था और यह इसलिए भी बड़ा था क्योंकि यह मेन लाइन में था जिसके फूटने से न सिर्फ जमीन के अंदर की मिट्टी,गिट्टी और बोल्डर बाहर आ गए बल्कि आसपास की दुकानों में भी पानी भर गया। पाइपलाइन के पास लगी दुकान के नीचे की मिट्टी तक सरक गई दुकान के धराशाई होने का खतरा बढ़ गया शुक्र इस बात का रहा कि वह गिरी नहीं।
*क्यों फूटी जॉइंट पर से पाइप लाइन..??*
दरअसल सतनवाड़ा से शिवपुरी तक 17 किलोमीटर की पाइपलाइन जो कि जीआरपी पाइप से बनी थी उसके बदले में डीआई पाइप को डाला जाना था, पिछले साल दिसंबर लाइन बदलने का काम टुकड़ों में चालू होते-होते एक माह लग गया था जिसमें भी लाइन ग्वालियर बायपास तक ही पहुंच पाई थी। उसके बाद एक टुकड़ा जो लगभग 30 मीटर का था और रोड़ को क्रॉस करता था को भी बदला जाना था परन्तु ठेकेदार पूरे काम के भुगतान को लेकर अड़ गया पर संस्थान वित्तीय हालत खराब होने के कारण पूरा भुगतान करना संभव नहीं था तो मामला टलता गया इसके बाद होली पर ठेकेदार की लेबर चली गई लौट के आने में 15 दिन गुजर गए। जैसे ही मार्च का महीना लगा सीएमओ और नगर पालिका अध्यक्ष ने मड़ीखेड़ा पाइपलाइन का काम देख रही कंपनी बानगो प्रायवेट लिमिटेड पर बाकी के बचे काम को पूरा करने का प्रेशर बनाना चालू कर दिया तो कंपनी ने भुगतान की बात को लेकर मामले को और टालना चालू कर दिया इसी दरम्यान राज्यपाल और कुछ मंत्रियों का मूवमेंट भी क्षेत्र में था तो रोड खोदकर काम करने में काफी दिक्कत भी थी और गर्मियों की शुरुआत हो चुकी थी जिससे यह हिस्सा ऐसे ही 12 माह तक पड़ा रहा।
*ठेकेदार की हठधर्मिता से हजारों गैलन पानी रोड के दोनों ओर बने ज्वाइंटों से पूरे साल बहता रहा।*
यहां आपको बता दे की मार्च से चालू हुई मणिखेड़ा पानी की सप्लाई में बड़ी लाइन में तो कभी कोई दिक्कत नहीं आई क्योंकि जो मेल लाइन थी वह डीआई पाइप से बनी थी जिसकी 100 साल की टूट-फूट एवं फ्रैक्चर की गारंटी थी लेकिन ठेकेदार द्वारा ग्वालियर बायपास रोड पर क्रॉसिंग लाइन छोड़ दी। इस लाइन के न डालने के कारण जनवरी 2025 से अब तक हजारों गैलन पानी बह चुका है जिसकी भरपाई न ठेकेदार कर सकता है और न ही नगर पालिका शिवपुरी के जिम्मेदार। एक ट्रायल में पता चला था कि रोड के दोनों ओर मेन लाइन से लगातार 24 घंटे पानी बहता था, जिसकी रफ्तार इतनी थी कि 18 सेकंड में 15 लीटर की एक कट्टी भरी जा सकती थी, अगर दोनों ओर से बहने वाले पानी का कैलकुलेशन किया जाए तो 60 मिनट में 200 कट्टी यानि 3000 लीटर पानी मात्र एक घंटे में, 24 घंटे में 4800 कट्टी यानि 72000 लीटर पानी, 1माह में 1,44000 कट्टी यानि 21,60,000 लीटर पानी और 12 माह में 17,28000 कट्टी यानि 2,59,20,000 लीटर पानी सिर्फ़ एक तरफ़ से ही बह चुका है अब
अगर दूसरी तरफ की बात करें तो यही आंकड़ा ठीक इसका दुगना बैठेगा यानि 5,18,40000 लीटर पानी का शुद्ध दुरुपयोग हुआ है। एक पांच लोगों की फैमिली वाला घर जिसमें रोज़ाना लगभग 500 लीटर की खपत हो ऐसे लगभग 103680 घर का एक दिन का पानी सिर्फ ठेकेदार की लापरवाही और पेमेंट की डिमांड की हठधर्मिता की भेंट चढ़ चुका है। इसका हर्जाना आखिर देगा कौन..??
*पहले 28 फ़िर 29 अब 1 की बोल रहे जिम्मेदार, लेकिन लापरवाह बना बैठा है ठेकेदार..*
24 तारीख से पानी की सप्लाई बंद होने के बाद नगर पालिका के जिम्मेदारों द्वारा यह बात कही गई थी कि हम शहर को 28 तारीख तक हर हाल में पानी दे देंगे, लेकिन ठेकेदार ने नानुकूर करते-करते तीन दिन गुजार दिए, मामले की नाजुकता को देखते हुए सीएमओ इशांक धाकड़ ने ठेकेदार को FIR की धमकी तक दे डाली जिसपर ठेकेदार ने कोर्ट के आदेश दिखा दिए फिर हुआ मानमनोव्वल का दौर शुरू होते-होते नतीजा यह हुआ कि 28 तारीख से कार्य की शुरुआत की गई। लाइन को एक जॉइंट से दूसरे जॉइंट तक जोड़ना था लेकिन अब ग्वालियर बायपास से बस स्टेंड की तरफ भी लाइन को मोड़ा जाना है जिसमें रोड को खोदने और लाइन डालने में अधिक समय लग रहा है। इस वजह से पानी सप्लाई का सही आंकड़ा निकालना मुश्किल हो पा रहा है। ए सचिन चौहान का कहना था कि हम हर हालत में 29 तारीख तक पानी दे देंगे वह तारीख तो निकल चुकी है अब वहीं सीएमओ कह रहे हैं कि 1 जनवरी तक शहर को हर हाल में पानी मिल जाएगा। वही ठेकेदार की कछुआ चाल तो कुछ और ही बता रही है अगर काम की गति को देखें तो 5 तारीख से पहले पानी मिल पाना मुश्किल है।
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