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डोंगर की डांग में टाइगर का हमला, ग्रामीणों में दहशत.. ग्रामीण बोले शेर ने इंसान का खून चखा हो गया आदमखोर,अब दोबारा करेगा हमला, अधिकारी बोले सब झूठ..

डोंगर की डांग में टाइगर का हमला, ग्रामीणों में दहशत.. ग्रामीण बोले शेर ने इंसान का खून चखा हो गया आदमखोर,अब दोबारा करेगा हमला, अधिकारी बोले सब झूठ..

*डोंगर की डांग में टाइगर का हमला, ग्रामीणों में दहशत.. ग्रामीण बोले शेर ने इंसान का खून चखा, हो गया आदमखोर अब दोबारा करेगा हमला, अधिकारी बोले सब झूठ..
 ।।चर्चित समाचार एजेंसी।।
 ।।शिवपुरी 01/01/2026।। माधव टाइगर रिजर्व में बीते 27 दिसंबर को  बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन को छोड़ा गया, नए साल की सुबह ही बाघिन ने सतनबाड़ा के डोंगर गांव में खेत पर शौच गए एक ग्रामीण पर हमला कर दिया। हालांकि हमला पैर पर किया इसलिए ग्रामीण की हालत तो ठीक है,लेकिन गांव में दहशत फैल गई है। सूचना मिलने पर नेशनल पार्क और सामान्य वन मंडल की टीम गांव में पहुंच गई। 
बीते 27 दिसंबर की सुबह बांधवगढ़ से लाई गई बाघिन को शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। इस बाघिन को अभी तक अपना ठिकाना नहीं मिल पाया, इसलिए वो जंगल में भटकती हुई गांव की आबादी तक पहुंच रही है। 31 दिसंबर को यह बाघिन नरवर रोड पर स्थित चाड गांव में पहुंच गई थी, जिसकी सूचना जब ग्रामीणों ने वन विभाग को दी, तो सतनबाड़ा रेंजर माधव सिंह सिकरवार अपनी टीम के साथ गांव में पहुंचे थे। 
रात में यह बाघिन जंगल के रास्ते से होकर डोगर गांव में पहुंच गई। आज सुबह 7 बजे जब गांव में रहने वाला शिवलाल बघेल (65) अपने खेत के पास खुले में शौच कर रहा था, तभी बाघिन ने उसके पैर के पंजे पर हमला कर दिया। चूंकि शिवलाल पाल जूते पहने हुए था, इसलिए बाघिन का हमला गहरा जख्म नहीं दे पाया।ग्रामीण के चिल्लाने पर बाघिन वापस जंगल में भाग गई, तथा ग्रामीणों की भीड़ इकठ्ठा हो गई। बाघिन के गांव में आ जाने की खबर से न केवल डोंगर बल्कि आसपास के गांव में भी दहशत हो गई। चूंकि बाघिन ने इंसान पर हमला किया है, इसलिए ग्रामीणों की चिंता अधिक है, क्योंकि यदि टाइगर आदमखोर हो गया, तो इंसानों की जान को बड़ा खतरा बन जाता है। 
 *माधव टाइगर रिजर्व में नया ठिकाना ढूंढ रही बाघिन* 
चार दिन पहले बांधवगढ़ से लाकर माधव टाइगर रिजर्व में छोड़ी गई बाघिन अभी तक नए जंगल में अपना ठिकाना नहीं बना पाई। चूंकि शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में जंगल के बीच भी गांव बसे हुए हैं, इसलिए बाघिन लगातार जंगल में भटक रही है। अभी तक उसे जंगल में शायद दूसरा टाइगर नहीं मिला है, इसलिए वो एक जगह रुक नहीं पा रही। 
 *हो सकता है पर्यटन के साथ आमजन को खतरा* 
शिवपुरी के माधव टाइगर रिजर्व में टाइगरों के आने के बाद पर्यटकों की संख्या में तो इजाफा हो सकता है, लेकिन साथ में आमजन की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है। टाइगरों के जंगल में बढ़ने से तेंदुए इधर-उधर भाग रहे हैं, और अब टाइगर भी जब गांव की तरफ बढ़ने के साथ ही इंसानों पर हमला कर रहे हैं, तो फिर कहीं न कहीं भविष्य में जंगल के बीच व उसके आसपास बसे गांव के लोगों को खतरा भी बढ़ गया है।
 *ग्रामीणों ने कहा जानबूझ कर आदमखोर बुलाया गया..* 
ग्रामीणों ने कहा कि बांधवगढ़ से जिस टाइगर को शिवपुरी माधव टाइगर रिजर्व  में लाया गया है वह पहले से ही आदमखोर है तथा बांधवगढ़ रहते हुए इसने कई लोगों पर हमले भी किए हैं हमारे पास इस बाघ की खबरों की कई पेपर की कटिंग भी है वही नेशनल पार्क और वन विभाग के अधिकारी यह कह रहे हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं है ना ही तो इस मादा टाइगर ने  किसी मानव पर कोई हमला किया है और ना ही किसने किसी मानव को आज तक जान से मारा है तो यह सब बातें मिथ्या है कि मानव खून पीकर बाघ आदमखोर हो जाएगा। रही बात इस हमले की तो यह भी अभी निश्चित नहीं है कि बुजुर्ग के पैर में जो जख्म आए हैं वह टाइगर के हमले के ही हैं क्योंकि अगर टाइगर हमला करता है तो निश्चित तौरपर उस जगह से खाल और मास दोनों ही हट जाता है अब यह डॉक्टर ही बता पाएंगे कि सच्चाई क्या है, रही बात ट्रैकिंग की तो हमारी टीम बराबर लगी हुई है अब कोहरे के समय टाइगर को ट्रेस कर पाना थोड़ा मुश्किल होता है हमारा प्रयास रहता है कि हम ग्रामीण आबादी वाले क्षेत्र में टाइगर के मूवमेंट को पकड़कर ग्रामीणों को पहले से इत्तिला कर दें।
 *प्रशासन की नज़र में डोंगर हुआ विस्थापित, ग्रामीण बोले सब नहीं हुए विस्थापित..* 
प्रशासन की नजर में वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र को टाइगर रिजर्व  कॉरिडोर में ले लिया गया है क्योंकि 2005 से पहले इस क्षेत्र का राजस्व द्वारा मूल्यांकन कर मुआवजा दे दिया गया था इसलिए यह क्षेत्र कॉरिडोर सीमा में आ चुका है अतः यहां पर से डोंगर गांव सरकारी कागजों में विस्थापित हो चुका है और यह लोग पूरी तरह सरकारी जमीन है वहीं ग्रामीणों का कहना है की स्थापना के समय ना ही तो ग्राम सभा बुलाई गई और ना ही हमसे सहमति पत्र लिया गया चुकिं अपने हिसाब से विस्थापन मूल्यांकन कर छोटी-मोटी मुआवजा राशि बांट दी गई जिसे कुछ परिवार ने तो ले लिया पर कुछ लोगों ने लेने से मना कर दिया जिनका मामला अभी भी पेंडिंग पड़ा हुआ है। 
टाइगर को ट्रेस करके उसे जंगल की ओर भगा दिया है अब उसका मूवमेंट जंगल में आ रहा है रही बात ग्रामीण क्षेत्र की तो बफर जोन में टाइगर का मूवमेंट रहता है कोशिश करते हैं कि ग्रामीणों को इत्तिला कर दिया जाए पर अगर फिर भी कोई हादसा होता है तो उसका सरकार विधिवत मुआवजा भी देती है।
मुकुल सिंह ठाकुर 
असिस्टेंट डायरेक्टर माधव टाइगर रिज़र्व 

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