युवराज के स्वागत में नेताओं ने शहर को बैनरों से पाटा, पर भीड़ नहीं जुटा पाए....
शिवपुरी शहर की कुल आबादी का 1% हिस्सा भी नहीं था भीड़ में मयस्सर.... क्या सफेद कलपदार लिबास वाले नेताओं से आमजनता का मोह भंग..??
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
सांसद #JyotiradityaMScindia के पुत्र युवराज #mahanaaryamanscindia का #mpca अध्यक्ष बनने के बाद प्रथम बार शिवपुरी नगर आगमन हुआ जिसमें शिवपुरी के नेताओं ने पलक पांवड़े बिछा दिए ग्वालियर बाईपास से लेकर झांसी चौराहे तक आतिशी स्वागत में गुना शिवपुरी क्षेत्र से सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक नेताओं ने जगह-जगह मंच लगाकर अपनी-अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, जिसमें फूल-मालाओं से लेकर दीप जलाकर आरती उतारना और आरती से लेकर बृहद आतिशबाजी और आतिशबाजी से लेकर लड्डुओं से तौलने तक की व्यवस्था चकाचौंध थी, बस कमी थी तो भीड़ की जो इस भीड़ में उपस्थित सभी तरह के नेता फिर वह चाहे #विधायक, #अध्यक्ष, #मंडल, #भाजपाई #सिंधिया समर्थक, मूल भाजपाई, अमूल्य भाजपाई, नवागत नेता, कारोबारी नेता, जुगाड़ी नेता, कबाड़ी नेता, से लेकर भूमाफिया शुद्ध ही क्यों न हों जो कि इस में मौजूद भी थे और जिनपर कार्यक्रम को आकर्षक बनाने के लिए पैसा तो था पर,लोगों को इकठ्ठा करने के लिए न तो मानमनौवल का कोई आधार था (मानमनौव्वल का आधार मतलब यह लोग कभी आमजनता से मिलते ही नहीं हैं गरीबों की जमीनों को फंसाकर सस्ते दामो में खरीदने वाले ज़मीनी में कमीनी की उपाधि प्राप्त यह लोग) और न ही गरीब बस्तियों में जाकर पैसे के बल पर लोग इकट्ठा करने की ताकत, क्योंकि पैसा होना और खर्च करने में जमीन आसमान का अंतर है।
*संसदीय क्षेत्र की कुल आबादी का 0.1 परसेंट और शहर की आबादी का महज 1% हिस्सा भी नहीं था स्वागत में*
सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवपुरी गुना लोकसभा क्षेत्र के बहुत ही लोकप्रिय नेता हैं अपने नेता की एक झलक पाने जनता घंटों इंतजार करती है ऐसा कहा जाता है अब हम संसदीय क्षेत्र गुना-शिवपुरी की बात करें तो यह आबादी होगी लगभग 20 लाख जिसका 0.1 परसेंट यानि 2000 या फिर हम कार्यक्रम क्षेत्र की आबादी का हिस्सा ही पकड़कर चलें तो शिवपुरी शहर की आबादी होगी लगभग 2,50000 इस आबादी का कुल 1% हिस्सा भी आमजनता के रूप में भीड़ में नज़र नहीं आया, अगर पुलिस प्रशासन और समर्थक नेताओं को हटा दें तो केवल जो बमुश्किल बुलाए गए 100 - 200 लोग या थीम रोड़ से बराबर गुजरने वाली आमजनता ही थी जो चलते चलते भीड़ का हिस्सा भी बन रही थी और चौराहे तक जाने वाली जनता पीछे से स्वागत करती हुई आगे तक आ रही थी, जिससे लग तो रहा था कि मानो भीड़ है पर आमजन के नाम पर नेताओं की कमांड वाली जनता नहीं थी जिससे प्रतीत हो रहा था कि नेताओं ने चेहरे चमकाकर पैसे तो बहुत कमा लिए पर लोग कमाना भूल गए, यह परिस्थिति आने वाले लोकसभा चुनाव में दुख दाई हो सकती है।
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