नगरपालिका के कर्मचारियों की सामूहिक कुटाई या हुआ हमला...???
*नगर पालिका शिवपुरी के कर्मचारियों की हुई कुटाई या हुआ उनपर हमला.. ..??*
*।।चर्चित समाचार एजेंसी।।*
शिवपुरी नगर पालिका के वार्ड नंबर 24 में आज दोपहर लगभग 1:00 बजे नगरपालिका के कुछ कर्मचारीयों पर हमला हो गया। यह हमला इसी वार्ड में निवासरत एक आदिवासी परिवार द्वारा किया गया। हमले में लात घूंसे से लेकर चप्पल,जूते और पत्थर,खंडों का भी इस्तेमाल बखूबी किया गया।कुछ कर्मचारियों को चोटें भी आईं।इसी बीच नगरपालिका के कर्मचारी जो " *बुद्धि में कम पर शरीर में हाथी सा रखते हैं दम"* के द्वारा बीच बचाव भी किया गया। बाद में यह लोग कहां गए..?? कुछ पता नहीं चला।
दरअसल नगरपालिका क्षेत्र के वार्ड नंबर 24 में पुरानी शिवपुरी स्थित महलसराय बस्ती जोकि, आदिवासीयों की बस्ती मानी जाती है वहां पर निवासरत एक आदिवासी परिवार द्वारा सुलभ शौचालय को तोड़ा जा रहा था। जिसकी ख़बर वहां पर निवासरत अन्य आदिवासी परिवारों ने नगरपालिका के जिम्मेदारों को दी, सूचना पाकर नगरपालिका के अतिक्रमण प्रभारी अशोक खरे अपना दस्ता लेकर मौके पर पहुंच गए, जहां पहुंच कर उनकी टीम ने उस परिवार को ऐसा करने से मना किया, लेकिन उस परिवार ने नगरपालिका की टीम की बात को अनसुनी कर दी, इसके बाद टीम ने थोड़ी सख्ती दिखाई जो उस परिवार को नागवार गुजरी। फिर क्या था, हो गई लेवा- देवी..। सुना है आदिवासी परिवार के सदस्यों के हाथ में जो आया उसका भरपूर इस्तेमाल किया गया..!! इस युद्ध में हाथ, लात, चप्पल,जूते, डंडे- खंडे सभी का बड़ी ही चालाकी से मग़र भरपूर इस्तेमाल किया गया।
*पिटने वाला चिल्ला रहा था, पीटने वाला अपना हुनर दिखा रहा था..!!*
इस लड़ाई में सबसे अच्छी बात यह थी कि पिटने वाला बार- बार यही कह रहा था कि, मेरी कोई गलती नहीं, मैने कुछ नहीं किया,और पीटने वाला कुछ भी सुनने को तैयार ही नहीं था, _मानो ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस परिवार के सदस्यों द्वारा नगरपालिका के जिम्मेदारों की पिटाई नहीं बल्कि आस- पास के अन्य आदिवासी परिवार के लोगों को इस कुटाई के माध्यम से सबक दिया जा रहा था, इधर पीठ नगरपालिका के कर्मचारियों की सुजाई जा रही थी और मज़ा पूरे परिवार को आ रहा था।_
*इस युद्ध में पराक्रमी खरे निश्चित ही रह गए थे धरे..*
_बात- बात पे गुस्सा भरी आंखे दिखाने वाले खरे,_
_इस बार कैसी भयंकर मुश्किल में परे.._
_जैसे ही सहरियाओं ने दबोचा, सारे अरमान रह गए धरे के धरे.._
वैसे खरे और उनकी टीम बहुत ही दबंग किस्म की है परंतु इस लड़ाई में खरे और उनकी टीम का इस तरह पिटना वो भी बिना गलती के समझ के परे है।एक बुद्धजीवी पार्षद रूपी ठेकेदार का तो यह भी कहना है कि यह तो बहुत ही गलत हुआ, नगरपालिका के जिम्मेदार जब गलत करने जाते हैं तो सीना चौड़ा करके ठोक के लाते हैं और जब कुछ सही करने गए तो कुट आए..
या अल्लाह क्या होगा इस नगरपालिका का.???
स्वच्छता अभियान में हाल ही हुआ था शौचालय रिनोवेट...
वार्ड नंबर 24 की महल सराय बस्ती के इस सार्वजनिक शुलभ शौचालय का 6 - 7 दिन पहले ही स्वच्छता अभियान के तहत रिनोवेशन हुआ था और अभी भी उसमें साफ- सफाई को लेकर काम चल ही रहा था। परन्तु वहां पर स्थित आदिवासी परिवार ने इस शौचालय को लेकर काफी आपत्ति जताई थी सुना है कि इस सुलभ शौचालय की जमीन को लेकर परिवार का कोई विवाद है जिसे लेकर आदिवासी परिवार ने उस शौचालय को तोड़ने का प्रयास किया, परन्तु वहां की ज्यादातर आबादी को यह रास नहीं आया और कर दी शिकायत।
एक टिप्पणी भेजें