क्या बच्चे की मौत भुला चुका है शहर...?? परिवहन विभाग की कार्यशैली तो यही बता रही...!!
RTO और पुलिस स्टाफ बस में चढ़कर कर रहा खाना पूर्ति...
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी/ग्वालियर।। अनन्य जैन की मौत को ज्यादा वक्त नहीं बीता है, मां बाप के आंसू अभी रुके भी नहीं, और तो और परिजन भी गाहे बगाहे फेसबुक पोस्ट से अपना दुख शेयर करने से भी पीछे नहीं हैं। बात अगर बस में आग की चल जाए तो आमजन से कोई भी उफ्फ करे बिना नहीं रहता,फिर इस गंभीर लापरवाही का बोझ परिवहन विभाग अपने कंधों पर लिए इस बेशर्मी से कैसे घूम रहा है..??
क्या आत्म बोध होता है कि बच्चे के कातिल हम ही हैं..??
क्योंकि RTO विभाग किसी की अनफिट बस को अपनी मौजूदगी में सड़कों पर ऐसे दौड़ा रहा है जैसे बिल्कुल कंपनी से पेटी पैक न्यू बस रोड पर उतरी हो बिना यह परवाह किए कि वाकई में वह चलने योग्य है या नहीं..!!
जब मौत ने खड़े करे सवाल तो कच्ची नींद में जगा महकमा..
चार साल के अनन्य जैन कि इंटरसिटी बस में आग लग जाने से मौत हो गई, पूरा शहर गमगीन हुआ और पूरे प्रदेश में खबरें चली,रोष हुआ।
"फिर महकमा, रोड़ पे आया और कुछ बसों की चेकिंग की, कुछ का चालान बनाया..।
पर जो बसें अनफिट थी उनको रोड़ से नहीं हटा पाया.."
आखिर क्यों..??
दरअसल कागजों में एक ही नंबर की दो से तीन बसें चल रही हैं वो भी RTO की सरपरस्ती में और यह बात परिवहन विभाग का मुखिया अच्छे से जानता है लेकिन जैसे ही रोड़ों पर चेकिंग और चालानी कार्रवाई होती है सबसे पहले यही बेजा बसें रोड़ों से गायब होती हैं और RTO केवल उन्हीं बसों को चेक करता है जो उसके कागजों में फिट हैं और फोटोसेशन में भी फिट दिखाई दें ताकि जनता को लगे काम हो रहा है। परन्तु वास्तविकता में कुछ समय के लिए वह बसें रोड़ से विलोपित कर दी जाती हैं जो या अनफिट हैं या रोड़ के अलावा कहीं भी नहीं हैं (एक ही नंबर पर चलने वाली डमी बसें) और विभाग का मुखिया दलालों के माध्यम से इसी फर्जीवाड़े के बस संचालकों से अच्छी खासी कमाई करता है।
पुलिस भी बनी है रेस का घोड़ा जिसको सिर्फ वही देखना है जो आला अधिकारियों ने बोला है..
बसों में चढ़कर केविन से जांचकर लौट आता महकमा और यातायात प्रशासन दोनों...
बकौल बस सवारी राजू अग्रवाल ग्वालियर से शिवपुरी लौटते वक्त चिरवाई नाके पर चेकिंग चल रही है ऐसा बस कंडक्टर ने ड्राइवर से बोला, ड्राइवर ने केविन सवारी को बस के अदंर गैलरी में धकेलने को बोल दिया,कंडक्टर ने भी ज़बरदस्ती केविन की सवारी को बस की गैलरी में ठूंस दिया। अन्दर जाकर बस में भेड़ बकरी की तरह भरी सवारियों को खुली हवा न मिलने और A/C को प्रॉपर काम न करने के चलते घुटन होने लगी। अब आगे क्या हुआ..??
बस रुकी, दो कांस्टेबल बस में चढ़े, सिर्फ एक सवाल किया, बस में आग बुझाने का है..??
बस कन्डेक्टर ने कहा, जी साहब आग बुझाने का भी है और इमरजेंसी एक्जिट खिड़की भी है बस इतना सुनकर चेकिंग स्टाफ उतर लिया बस से..।
सवारी देखती रह गई कि शायद यह अंदर आएंगे और हमारी पीड़ा को सुनेंगे क्योंकि सबको यही कहकर भरा था कि सीट है आगे खाली हो रही है दिलाता हूं मगर न तो सीट खाली हुई और न सवारी कम हुईं,उल्टा जो अंदर गई वह बाहर नहीं आ पाई। बस कुछ आगे चली तो कंडक्टर ने केविन फिर से भर ली अब जब कुछ सवारियों ने इसका विरोध किया तो कंडक्टर और ड्राइवर दोनों चढ़ बैठे सवारियों पर,
बोले.. ..
डीजल बढ़ गओ, RTO का चढ़ावा बढ़ गओ, बसन में काम कौ खर्चा बढ़ गौ, तुमाओ भाड़ा बढ़ों का..?? वोई 150 लै रहे जामई चिक चिक..!!
ज्यादा करोगे तो बस से बाहर कद दंगौ...
इतना सुन बस सवारी चुप, कुछ देर बड़बड़ाकर कंडक्टर चुप, कुछ समय बाद विभाग भी चुप, फिर पत्रकार चुप, फिर जिसका गया उसके अपने भी चुप..।।
और अंत में एक बात....
फिर कोई काल के गाल में जाएगा..
मरने के बाद अपनों से ऊधम मचबाएगा............
इसी बहाने विभाग फिर से रोड़ों पर आएगा...
फ़ोटो सेशन और कागजी खाना पूर्ति करके माल कमा ले जाएगा..
यूं ही चलता रहेगा चक्र पर कोई नतीजा निकलकर नहीं आएगा..।।
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