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तेंदुए के शिकार में आरोपी को दिलाई जमानत..अधिवक्ता चतुर्वेदी की टीम उतरी बचाव पक्ष में..

तेंदुए के शिकार में आरोपी को दिलाई जमानत..अधिवक्ता चतुर्वेदी की टीम उतरी बचाव पक्ष में..

तेंदुए के शिकार के आरोपी को अग्रिम जमानत कोर्ट ने कहा, ठोस सबूत नहीं...
 ।।चर्चित समाचार एजेंसी।।
 ।। शिवपुरी 06/06/2026।। वन परिक्षेत्र शिवपुरी के बिरधा बीट क्षेत्र में मृत मिले तेंदुए के मामले में आरोपी बनाए गए जयप्रकाश गुर्जर को सत्र न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने अग्रिम जमानत याचिका क्रमांक 363/2026 पर सुनवाई करते हुए प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश श्री संजय श्रीवास्तव ने आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान कर दी।
न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि प्रकरण में ऐसे कोई ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं, जिनसे यह साबित हो सके कि आरोपी ने तेंदुए का शिकार किया या किसी अपराध में उसकी संलिप्तता है।
 यह थे वन विभाग के आरोप और यह था मामला..
वन विभाग ने पी.ओ.आर. क्रमांक 1014/2022 दिनांक 19 मई 2026 के तहत वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 39 एवं 50 के अंतर्गत कार्रवाई की थी। विभाग का आरोप था कि तेंदुए के शव को तार से बांधकर घसीटा गया और साक्ष्य मिटाने के लिए झाड़ियों में आग लगाई गई।
 बचाव पक्ष केअधिवक्ता ने तर्क में कहा,लापरवाही से हुई मौत.. 
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अंकुर  चतुर्वेदी एवं उनके सहयोगी अधिवक्ता कुमारी दीक्षा रघुवंशी, एरिस खान, एवं चंद्रभान सिंह कोटिया ने न्यायालय में दमदारी से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि, तेंदुआ पहले से घायल अवस्था में देखा गया था उसके पैर में गंभीर चोट थी और नाक से खून निकल रहा था जिसका समय पर इलाज नहीं किया गया। यहां यह तर्क दिया गया कि मृत्यु शिकार से नहीं बल्कि कमजोरी, गर्मी, भूख-प्यास और पुरानी चोटों के कारण हुई थी।
साथ ही अधिवक्ता अंकुर चतुर्वेदी ने  वन विभाग पर आरोप लगाते हुए यह भी कहा कि वन विभाग अपनी लापरवाही छिपाने के लिए एक निर्दोष ग्रामीण को फंसा रहा है।
 पुराना समाचार ही बना सवालों का आधार..
इस मामले से जुड़ा एक पूर्व प्रकाशित समाचार भी चर्चा में रहा, जिसमें तेंदुए के साथ कथित बर्बरता की तस्वीरें सामने आई थीं। उस समाचार में दिखाया गया था कि,तेंदुए के पैर की हड्डी बाहर निकली हुई थी,नाक से खून बह रहा था और शव को तार से बांधकर घसीटे जाने के संकेत मिले थे,साथ ही यह भी उल्लेख था कि तेंदुआ तीन दिन पहले घायल अवस्था में देखा गया था लेकिन उसे इलाज नहीं मिला। यही तथ्य अब कोर्ट में बचाव पक्ष के तर्क का महत्वपूर्ण आधार बने।
 इस मामले में माननीय न्यायालय का फैसला कुछ यूं रहा...
न्यायालय ने प्रकरण डायरी, पंचनामा और अन्य दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद पाया कि,आरोपी के खिलाफ प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं हैं,कोई वन्यजीव सामग्री आरोपी से बरामद नहीं हुईआरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है,इसी आधार पर कोर्ट ने आदेश दिया कि,गिरफ्तारी की स्थिति में आरोपी को 50 हजार के मुचलके और समान राशि के बंधपत्र पर रिहा किया जाए,साथ ही कहा कि आरोपी को जांच में सहयोग करना होगा, आरोपी गवाहों को प्रभावित नहीं करेगा, और सभ्य आचरण स्थापित करेगा।

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