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मेले की म्याद हुई पूरी फिर भी चल रहा मेला, आखिर कौन है वो वंदा कर रहा इसमें खेला..??

मेले की म्याद हुई पूरी फिर भी चल रहा मेला, आखिर कौन है वो वंदा कर रहा इसमें खेला..??

।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।।शिवपुरी 27/06/2026।। शिवपुरी के सिद्धेश्वर प्रांगण में लगने वाला ग्रीष्मकालीन मेला अब गर्मियों की जगह बरसातों में जगह लेने लगा है और इस बदलाव का कोई बड़ा कारण नहीं बस इतना समझ लीजिए कि पैसे ने रंग बदला तो मेले का समय भी बदला। नगर पालिका के जिम्मेदार कर्मचारी बताते हैं कि यह जो मेला है वह आम जनता के मनोरंजन के लिए लगाया जाता है और यह घाटे व फायदे से परे रहता है लेकिन कुछ जिम्मेदार सीएमओ को यह बात समझ नहीं आई और मेला जो कभी सिर्फ एक ए आर आई यशपाल जाट की बपौती हुआ करता था को सामूहिक भोज का केंद्र बिंदु बनाकर ठेका प्रथा में ला दिया, अब इसमें केवल ए आर आई जाट की नहीं बरन नगर पालिका अध्यक्ष, सीएमओ,फाइल चलाने वाले बाबू सहित पार्षद और नगर पालिका का भी बड़ा हिस्सा रहने लगा, चूंकि बाबू और पार्षद तो सिर्फ मेले के पास से ही बाईपास हो जाया करते थे पर इसकी ठेका प्रथा से मिलने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा नगर पालिका के कोष में जमा होने लगा, बाकी मेले में कागजी खानापूर्ति के नाम पर अध्यक्ष और सीएमओ दोनों कमाने लगे।
इस बार इशांक ने किया था बड़ा बदलाव.. 
इस साल 2026 की मार्च में लगने वाले मेले का स्थान ही नहीं अपितु नाम ही परिवर्तित कर दिया और वह मेला जो कभी सिद्धेश्वर प्रांगण में लगकर सिद्धेश्वर मेला के नाम से जाना जाता था वह उसी समय गांधी पार्क में किसी और नाम से अपनी पहचान विकसित करने लगा।
गांधी पार्क में मेला लगाने को लेकर लोगों ने दिखाया था आक्रोश.. 
गांधी पार्क में मेला शिफ्ट करने पर सीएमओ और कुछ संगठन आमने-सामने आ गए थे, स्थान परिवर्तन को लेकर लोगों में आक्रोश भी था मीडिया में सिद्धेश्वर मेले की पहचान खत्म करने और जुगाड़ में मेला ठेकेदार को देने की आवाजें भी उठने लगी जिससे मेला नियत समय पर नहीं लग पाया था।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद बड़ी थी मेले की धनराशि.
चूंकि मेला मीडिया की सुर्खियों में जगह बनाने लगा इसलिए इस मेले के संचालन पर रोक लगा दी गई, वहीं यह बात शिवपुरी के तत्कालीन कलेक्टर के कानों तक गई और इसकी राशि जो 11,25,000 एक माह के लिए थी को 17,50,000 के लगभग जाकर खड़ी कर दी जिससे मेले ठेकेदार को आर्थिक कष्ट पहुंचा, पर सीने में दर्द नगर पालिका ARI यशपाल जाट को होता रहा ऐसा लग रहा था मानो यह मेला खुद यशपाल जाट ही चला रहा है।
फ्री में मेला चलाने की रची थी पटकथा.. 
शिवपुरी नगर पालिका के ए आर आई यशपाल जाट ने पहले तो ठेकेदार भागचंद शिवहरे को सिद्धेश्वर मेला 51 लाख में दिलवा दिया फिर अनुमति- स्वीकृति की आड़ में फ्री में मेला चलाता रहा जब "चर्चित समाचार" को यह जानकारी प्राप्त हुई तो इसकी पड़ताल की गई जिसमें पाया गया कि वाकई में नगरपालिका शिवपुरी को बिना शुल्क जमा किए इस मेले का संचालन किया जा रहा है जो पूरी तरह अवैध है उसके बाद ही अनुभागीय अधिकारी (SDM) द्वारा मेले में ताला डालकर 25 लाख की उगाई की गई जिसकी म्याद 25 जून तक थी।
 आज मेला मेला फिर से हुआ अवैध है कोई जिम्मेदार.. 
आज 27 जून है मेले की समयावधि निकल चुकी है परन्तु फिर भी हम नहीं चाहते हैं कि मेला हटे..। पर हम यह चाहते हैं कि मेले का राजस्व नगरपालिका और मंदिर दोनों को बराबर मिले, चूंकि शिवपुरी SDM आनंद राजावत ने पहले ही बता दिया था कि मेला 25 जून तक वैलिड है यानि इसके बाद यदि मेला और बढ़ता है तो नियम के हिसाब से उसका अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
पर सवाल वहीं का वहीं है क्या रिश्वत देने वाले चोरों से ईमानदार अधिकारी बच पाएंगे..?? 
क्या नगरपालिका के जिम्मेदार चोर फिर से हथेली नहीं लगाएंगे..?? 
क्या ARI जाट शिवपुरी में घर होने के बहाने, अपनी अवैध कमाई पर नहीं साधेगा निशाने..??

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