सिद्धेश्वर मेले का फैसला आज, ठेकेदार ने बकाया राशि जमा नहीं की तो लगेंगे चैक, FD होगी कुर्क ....
मेला ठेकेदार ने नहीं जमा की बकाया राशि तो जमा FD होगी कुर्क,सोमवार को लग सकते हैं बैंक में चैक..
।। चर्चित समाचार एजेंसी।।
।। शिवपुरी 29/06/2026।। शिवपुरी के सिद्धेश्वर मंदिर प्रांगण में लगे हुए मेले की म्याद 25 जून को पूरी हो चुकी है अब आगे मेले को बढ़ाने के लिए अतिरिक्त शुल्क जमा करना पड़ेगा यदि शुल्क नहीं जमा किया जाता है तो नगर पालिका शिवपुरी में मेला ठेकेदार भागचंद शिवहरे के जमा किए गए चैकों को नगर पालिका के बैंक खाते में लगा दिया जाएगा और बकाया राशि वसूल की जाएगी यदि वसूली राशि चेक में अंकित राशि से अधिक पाई जाती है तब मेला ठेकेदार द्वारा जमा एफ डी को भी कुर्क किया जाएगा यह कहना है शिवपुरी नगर पालिका के प्रभारी सीएमओ एवं नायब तहसीलदार अनिल धाकड़ का..।
दरअसल शिवपुरी के सिद्धेश्वर प्रांगण में लगने वाले मेले को पूर्व सीएमओ द्वारा 45 दिन की अनुमति के साथ 51 लाख एवं जीएसटी अतिरिक्त सहित कार्य आदेश दिया गया था, चूंकि मेले को स्वीकृति परिषद के द्वारा मिलनी थी जोकि वर्क आर्डर की फाइल में निर्देशित था, अब तत्कालीन सीएमओ के समक्ष बड़ा सवाल यह था कि परिषद को आहूत कैसे किया जाए.? क्योंकि नगर पालिका शिवपुरी में अध्यक्ष और पार्षदों की आपसी की खींचतान के चलते परिषद हो पाना नामुमकिन था यही कारण था कि स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी और स्वीकृति न मिल पाने के अभाव में एसडीएम आनंद राजावत द्वारा अनुमति भी नहीं दी जा रही थी क्योंकि मेला प्रांगण की जगह सिद्धेश्वर मंदिर ट्रस्ट की है जिसका ट्रस्टी मुख्य रूप से कलेक्टर होता है इस जमीन का जो शुल्क आता है वह मंदिर ट्रस्ट को जमा होता है अतः एसडीएम को यह जानकारी होनी चाहिए कि कितना रुपया नगर पालिका के द्वारा मेले के आयोजन के रूप में जमा कराया गया तथा उसकी कितने प्रतिशत राशि मंदिर ट्रस्ट में जमा होगी। यही कारण था कि स्वीकृति के अभाव में अनुमति नहीं मिल रही थी। इस अनुभूति और स्वीकृति की उधेड़बुन में मेले की फाइल को अवैध रूप से चलाने वाले पूर्व ए आर आई यशपाल जाट ने मेला ठेकेदार संग फ्री में मेला चलाने की साजिश रच दी। जिसका समय रहते पता चलने पर चर्चित समाचार द्वारा भारी विरोध किया गया और अंत में एसडीएम शिवपुरी द्वारा मेला के मुख्य द्वारों पर ताला डालकर ठेकेदार से 25 लाख की उगाई की गई । इस मेले की अनुमति 25 मई से 25 जून तक दी गई थी उसके बाद यदि मेला चलता पाया जाएगा तो वह अवैध कहलाएगा जिसके लिए मेला ठेकेदार को अतिरिक्त समय की अनुमति सक्षम अधिकारी से लेनी पड़ेगी और अतिरिक्त भुगतान भी करना पड़ेगा परंतु जब 27 जून तक नगरपालिका के जिम्मेदारों से ठेकेदार ने कोई बातचीत नहीं की तो हमने फिर से खबर लगाई जिस पर प्रभारी सीएमओ ने कहा कि सोमवार को हम चेक लगाकर अतिरिक्त राशि वसूल कर लेंगे यदि ठेकेदार द्वारा राशि जमा नहीं की जाती है तो।
*श्योपुर मेले में ठेकेदार भागचंद ने की मारपीट तो अब बकाया राशि जमा करेगा कौन..??*
श्योपुर में भी भागचंद शिवहरे द्वारा मेला लगाया जाता है,यह ठेकेदार जहां भी जाता है वहां अक्सर लड़ाई होती है इसके पीछे की मुख्य वजह यह है कि मेला ठेकेदार भागचंद और उसके गुर्गे ग्राहकों के साथ बदसलूकी, बदतमीजी और मनमर्जी करते हैं। जब कोई ग्राहक इनके खिलाफ आवाज बुलंद करता है तो इनके कटर और गुर्गे सामूहिक रूप से ग्राहक और उसके परिजनों की मारपीट कर देते हैं जब मामला थानों में पहुंचता है तो वहां भी ठेकेदार पैसे की दम पर थाना प्रभारी को चुप कर देता है और आखिरकार मामला थाने की चौखट पर ही दम तोड़ देता है। यदि कभी मामले में एफ आई आर हो भी जाती है तो केस डायरी न्यायालय तक पहुंचती ही नहीं है कारण थाने में उपस्थित स्टाफ ठेकेदार से माल लेकर के मामले से संबंधित डायरी को लंबे समय तक दबाए रखता है फिर यह डायरी थाने से न्यायालय तक पहुंचती ही नहीं है और अंत में मामला रफादफा हो जाता है इस बार भी शिवपुरी मेले में तथा श्योपुर मेला दोनों में ही ठेकेदार की गुर्गों ने ग्राहकों के साथ मारपीट कर दी जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर छाए रहे एक वीडियो में तो खुद ठेकेदार भागचंद हाथ में लाठी लेते हुए दिख रहा है तथा वह जमीन पर पड़े एक व्यक्ति पर बराबर लाठियां बरसा रहा है जिससे साफ प्रतीत होता है कि भागचंद शिवहरे एक क्रिमिनल मानसिकता का व्यक्ति है जिसे नगर पालिका प्रशासन हर साल ठेकेदार के रूप में व्यापारिक गतिविधियों में शामिल करता है। चूंकि श्योपुर मेले में जाट परिवार पर हुए हमले में खुद ठेकेदार का फोटों और वीडियो लोगो की नजरों मे आ गया इसलिए वह इस मामले में जेल पहुंच गया, अब इसके बाद शिवपुरी मेले पर संकट के बादल छाए हुए हैं।
*देखना यह है कि अब मेले की बकाया राशि भरेगा कौन..??*
*इसका आगे का संचालन करेगा कौन..??*
*इस पूरी फिल्म में मरना तो केवल और केवल व्यापारियों का होती है।*
*ठेकेदार अपनी राशि वसूल कर निकल चुका होता है।*
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